रात 12 बजे का सफर: Ghicha Ghat की वो परछाई… और मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी सीख
रात 12 बजे का सफर: Ghicha Ghat की वो परछाई… और मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी सीख
“कुछ रातें डराती नहीं… बदल देती हैं।”
ये बात है 2016 के आस-पास की, जब मेरे पास बाइक नहीं थी। मैं काम करता था अपने घर से करीब 15 KM दूर। हर दिन की तरह उस दिन भी मैं काम पर गया था… लेकिन वो रात मेरी जिंदगी की उन रातों में से एक बन गई, जिसे मैं आज भी भूल नहीं पाता।
Quick Note: ये घटना Belpahar (Jharsuguda) के अंदर Ghicha Ghat के पास रात 12 बजे की है। ये सिर्फ डर वाली कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसने मुझे आज भी ज्यादा सतर्क और मजबूत बनाया।
उस दिन काम बहुत ज़्यादा था…
काम इतना ज्यादा था कि रात का पता ही नहीं चला। धीरे-धीरे घड़ी ने 12 बजा दिए।
मेरे साथ जो बाकी लोग थे, वो सब पास में ही रहते थे, इसलिए उन्हें ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता था। लेकिन मैं… मुझे तो 15 किलोमीटर वापस जाना था, वो भी साइकिल से।
उस दिन काम बहुत भीड़ वाला था। मैं जल्दी निकल भी सकता था, लेकिन मैं रुका… क्योंकि सच ये था कि मेरे बिना वो काम पूरा नहीं हो सकता था। उम्र में सब मुझसे बड़े थे, लेकिन skill में मैं आगे था।
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है—ये छोटी बात नहीं थी। कभी-कभी हमारी मेहनत ही हमें अलग बनाती है। (और यही mindset आगे चलकर इंसान को जीतना भी सिखाता है)
“आज यहीं रुक जा…” लेकिन मैंने मना कर दिया
काम खत्म हुआ तो कुछ लोगों ने कहा:
“आज यहीं रुक जा… रास्ता सही नहीं है।”
उनकी बात में सच्चाई थी, लेकिन मैंने नहीं माना। उस समय मेरे मन में बस यही था कि—घर पहुँचना है।
आज मुझे लगता है कि समय इंसान को बहुत कुछ समझा देता है। कभी हम अपनी जिद में गलत निर्णय ले लेते हैं, और बाद में समझ आता है कि कौन-सा फैसला सही था। अगर आप भी कभी ऐसी स्थिति में रहे हैं, तो आप ये जरूर पढ़ सकते हैं: समय सबसे बड़ा गुरु है
मैंने साइकिल उठाई… और निकल पड़ा
पहले करीब 10 KM तक मैं बिल्कुल ठीक-ठाक चला आया। कोई डर नहीं… कोई परेशानी नहीं… सब normal।
लेकिन उसके बाद जैसे-जैसे रास्ता बदलने लगा, मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी बढ़ने लगी। क्योंकि आगे मुझे एक ऐसी जगह cross करनी थी जिसके नाम से ही लोग डरते हैं—
श्मशान घाट — Ghicha Ghat
ये जगह Jharsuguda जिले के Belpahar नगरपालिका के अंदर आती है। और आज भी लोग वहाँ दाह-संस्कार करते हैं।
आज तो वहाँ आसपास बहुत घर बन गए हैं… Road भी develop हो गई है… NH49 भी उसी किनारे से निकल गई है…
लेकिन उस समय… वो इलाका बहुत सुनसान था। एक bypass जैसा रास्ता था… अंधेरा… सन्नाटा… और ऐसा लगता था जैसे हवा भी कुछ बोल रही हो।
कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहाँ कोई भी अकेला जाए तो उसे “कुछ” महसूस होता है। शायद वो डर होता है… या मन का भ्रम… या उस जगह का इतिहास। पर सच ये है कि उस रात मेरे साथ जो हुआ, वो मेरे लिए बिल्कुल real था।
जैसे ही मैं श्मशान घाट के पास पहुँचा… मेरे कदम रुक गए
मैं डरते-डरते वहाँ पहुँचा ही था कि अचानक मुझे कुछ ऐसा दिखा… जिसने मेरी सांसें रोक दीं।
मेरे सामने… एक औरत… सफेद साड़ी में… लेकिन वो जमीन पर नहीं थी। वो हवा में थी।
उसकी साड़ी तो दिखाई दे रही थी… लेकिन उसका चेहरा नहीं था। और उसके पैर भी नहीं थे।
बस एक सफेद आकृति… जो मेरे सामने खामोशी से खड़ी थी।
उस पल मेरे शरीर ने जवाब दे दिया
सच बोलूं तो उस समय मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि—
- मेरे रोम-रोम में झुरझुरी दौड़ गई
- मैं पसीने से भीग गया
- मैं वहीं का वहीं रुक गया
- दिल की धड़कन इतनी तेज थी जैसे सीने से बाहर निकल जाएगी
उस पल मैं जितना डर रहा था, उतना ही मैं अपने अंदर टूट भी रहा था। क्योंकि इंसान जब अकेला होता है, तब डर और भी बड़ा लगने लगता है।
क्या वो सच में भूत था?
सच कहूं तो मैं आज भी 100% नहीं कह सकता कि वो क्या था। लेकिन उस रात मैंने जो देखा और महसूस किया, वो मेरे लिए बिल्कुल real था। कुछ चीज़ें जिंदगी में logic से नहीं… experience से याद रहती हैं।
और एक बात मैंने उस रात सीखी—डर से बड़ा हथियार होता है “खुद पर विश्वास।” अगर आपका self-confidence मजबूत है तो आप सबसे मुश्किल घड़ी में भी खुद को संभाल सकते हैं। (इस topic पर आपने Kalowrites में बहुत अच्छा लिखा है, आप चाहें तो ये भी पढ़ सकते हैं) खुद पर विश्वास कैसे बनाए रखें
फिर मेरे मन में एक सोच आई…
मैं डर जरूर रहा था… पर उस डर के बीच भी मेरे अंदर कहीं न कहीं एक आवाज आई:
“अगर इसे मुझे नुकसान पहुंचाना होता… तो ये इतनी देर मुझे क्यों देख रही है?”
मैंने खुद को संभाला। और फिर मेरे दिमाग में एक और बात आई…
“अगर मरना भी है… तो कोशिश करके मरूंगा।”
उस वक्त मैंने फैसला किया— अब रुकना नहीं है।
मैंने साइकिल चलाना शुरू किया…
मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ा… डर के साथ… लेकिन हिम्मत लेकर।
और जैसे ही मैं उसके और पास गया… वो परछाई मेरे पास आने के बजाय मुझसे दूर होने लगी।
मैं आगे बढ़ता… वो पीछे हटती… और फिर कुछ ही सेकंड में…
वो गायब हो गई।
ऐसे… जैसे वो कभी थी ही नहीं।
मैं रुका नहीं… और सीधा घर पहुंचा
उसके बाद मैंने एक पल भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बस साइकिल चलाता रहा…
और मैं अपने घर पहुँचा करीब 2:30 AM के आसपास। मैं थका हुआ था… डरा हुआ था… और अंदर से पूरी तरह हिला हुआ था।
सुबह जो पता चला… वो सुनकर मैं सन्न रह गया
अगली सुबह मुझे जो बात पता चली, उसने मेरे शरीर में फिर से ठंडक भर दी…
उस दिन उसी जगह एक औरत को जलाया गया था।
मैंने कुछ नहीं बोला… बस चुप हो गया। क्योंकि उस पल मुझे एहसास हुआ कि कुछ चीज़ें इंसान की समझ से बाहर भी होती हैं।
इस घटना से मुझे क्या सीख मिली? (Kalowrites का असली संदेश)
ये कहानी सिर्फ “डर” की कहानी नहीं है… ये मेरे लिए ज़िंदगी की सीख बन गई।
1) रात में अकेले सफर करना हमेशा safe नहीं होता
कई बार हम सोचते हैं “मैं कर लूंगा”… लेकिन सच ये है कि रात में अकेले निकलना risk होता है।
- अगर avoid कर सकते हों तो मत निकलो
- अगर निकलना पड़े तो साथ लेकर निकलो
- घर वालों को अपना route बता कर निकलो
2) डर लगना कमजोरी नहीं है
डर लगना इंसान का natural feeling है। लेकिन डर के कारण रुक जाना… ये जरूरी नहीं।
3) हिम्मत का मतलब डर का ना होना नहीं
हिम्मत का मतलब है— “डर होने के बावजूद आगे बढ़ना।” और उस रात मैंने यही किया।
4) सही समय पर सही फैसला करना सीखें
उस रात मैंने एक risky फैसला लिया। शायद वो सही भी हो सकता था, शायद गलत भी। लेकिन आज मैं मानता हूँ—सही फैसला वही होता है जिसमें आपकी सुरक्षा सबसे पहले हो।
5) Struggle ही इंसान को मजबूत बनाता है
कुछ लोग जीवन में हार मान लेते हैं, कुछ लोग परिस्थितियों से लड़ना सीखते हैं। और जो लड़ना सीख जाता है, वही मजबूत बनता है। अगर आप struggle को समझना चाहते हैं तो ये कहानी भी जरूर पढ़िए: हार बनाम संघर्ष (कहानी)
रात में अकेले सफर करने वालों के लिए 5 ज़रूरी Safety Tips
- अगर संभव हो तो रात में अकेले निकलने से बचें
- घर वालों को location/route पहले बता दें
- फोन में charge और torch जरूर रखें
- शॉर्टकट रास्तों से बचें, main road चुनें
- अगर डर लगे तो रुककर सांस लें और खुद को calm करें
अंतिम शब्द
हो सकता है कुछ लोग इस बात को कहानी समझें… और कुछ लोग इसे सिर्फ डर कहें… लेकिन मेरे लिए ये एक सच्चाई है। और इससे मिला हुआ एक सबक।
ज़िंदगी में कई बार ऐसे रास्ते आते हैं जहाँ डर भी होगा… पर रुकना नहीं है… चलना है। क्योंकि…
“जो डर के आगे चलता है… वही अपनी मंज़िल तक पहुँचता है।”
अगर आपको भी ऐसा अनुभव हुआ है…
क्या आपने कभी रात में ऐसा कुछ महसूस किया है, जिसे आप आज तक भूल नहीं पाए? नीचे comment में जरूर बताइए…
– Mukesh Kalo | Kalowrites

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